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Jan 30, 2015

घर वापसी :-)

बाहर के मेरे कमरे की
सीलन वाली दीवार पर लगा
सानिया मिर्ज़ा का poster

संकरी बंद गली मे खुलती
आधे कांच की खिड़की

सामने की सड़क के मोड़ पर
बंधी किसी की गाय

और उसके आगे के घर में
एक छोटा beauty parlor

Scooty और शहर की सड़कें
uncle और आंटियों की नज़रें

भूले बिसरे लोग
जानी पहचानी भाषा



A lifetime
since the last time
I was here
Here I come! :-)


Aug 29, 2014

शहर



नहीं जानती इसे मैं
नहीं समझता मुझे ये
रिश्ता कुछ,
उल्फ़तों  का बेरुख़ी सा है

मिलने मिलाने की कोशिश
सारी ज़ाया है
खुद में मगन ये
अहम सा बेखुदी सा है


ये जो दूसरा शहर है ..

अजनबी सा है
बड़ा है, खिला है
पर झूठी हंसी सा है




दिख जाते हैं फिर कभी
ऊँची इमारतों के पीछे वो बादल
जो वैसे ही हैं
जैसे थे मेरे शहर

उस रोज़ जब 
बारिश हुई यहाँ भी
वही नर्म सिहरन थी
जैसी होती थी मेरे शहर

शायद हम ही बदल जाते हैं
शहरों की आड़ लेकर।