Mar 27, 2012

परछाइयाँ

जिन दरवाजों पर सुबह-शाम दस्तक देते है लोग
उस घर में तो हम रहते ही नहीं
हाँ हमारी परछाई रहती थी कभी

और परछाइयों का क्या
आती-जाती रहतीं  हैं...

काश कोई हमारे घर तक पहुँचता
तो हमसे मुलाकात हो पाती ।



Mar 19, 2012

Irony

I wandered a whole long day
and a sleepless night,
for stars to be soother
and sun to be bright..

respectively  !!