Feb 4, 2012

कहानियां

कहानियों के गुच्छे
कुछ सुलझाने है तुम्हारे साथ
गर मिले कभी हम
फुर्सत से..

बताउंगी तुम्हे
क्यों वो कहानी
इतनी लम्बी थी
फिर.. एक छोटी सी;
क्यों उस वाली में
इतना रोयी थी
क्यों किसी और में
ज़रा खुश थी।
क्यों एक बार
शब्द नहीं दिए थे किरदारों को
क्यों अगली में फिर
जी भर कर बातें की थी
हाँ , एक कुछ फ़िल्मी थी
और एक कड़वा सच सी ...

बुरा लगेगा तुम्हे,
जानती हूँ
तुम्हारा ज़िक्र जो नहीं था
किसी कहानी में,
शायद तुम समझ पाओगे
तुम्हारे ही तो रूप लिए थे
सब  नायकों ने;

नायिका भी तो मैं ही थी
हर बार।

कुछ इसी तरह
ज़िन्दगी के तमाम पहलू
गुज़ारे है तुम्हारे साथ
तुम भी तो... थे ही नही,
मैं भी क्या करती?

Jan 21, 2012

मधुशाला

जितनी दिल की गहराई हो
उतना गहरा है प्याला,
जितनी मन की मादकता हो
उतनी मादक है हाला,

जितनी उर की भावुकता हो
उतना सुन्दर साक़ी है
जितना ही हो रसिक, उसे है
उतनी रसमय मधुशाला

मेरी हाला में सबने
पायी अपनी-अपनी हाला
मेरे प्याले ने सबने
पाया अपना-अपना प्याला,

मेरे साक़ी में सबने अपना
प्यारा साक़ी देखा,
जिसकी जैसी रूचि थी उसने,
वैसी देखी मधुशाला

       - बच्चन


Jan 13, 2012

बारिश

उस रोज़ बादल घिरे थे
जब हमें मिलना था

शिकायतें करनी थी
किस्से सुनाने थे
... बातें बाक़ी थी

इस बार के लम्बे इंतज़ार को
ख़त्म होना था
तुमसे मिल कर
बड़ी देर तक
बस तुम्हे देखना था

बिजली कड़क रही थी
फ़ोन पर नज़र जाती थी बार बार
अब तक कॉल नहीं किया तुमने
बिज़ी होगे शायद

कोहरा छा रहा था
दिन भी ख़त्म हो रहा था
कॉल नहीं आई;

तुम ही नहीं पहुचे शायद
जहां हमें मिलना था


उस रोज़..
बारिश भी ज़ोरों से हुई थी


Jan 4, 2012

Another start


When things don't go my way
they dont have to
but I just wish they do

everytime I have to take a turn
I dont always like,
the effort of finding new path
and knowing the people by side!
what if they don't turn good
and wouldn't match the stride.
would they ever understand me
or should I even try?

Oh, I even see another start
to carry things the right way,
... a better play of my part!!