पत्थरों के डर से रुकना मत
फूल होते तब देते
राह रोकें तो डरना मत
हाथ होते तो साथ देते
नीचा दिखायेंगे पर झुकना मत
बड़े होते तो यूं ना गिरते
गलतियां थोपेंगे, बिखरना मत
सही होते गर खुद सच्चे होते
रस्मों-रिवाज़ों से दबायेंगे सहना मत
नियम मानते तो निष्पक्ष होते
तुम्हारी जि़न्दगी चलायेंगे सौंपना मत
यही हक़ होता तो फिर भगवान होते
साथ छोड़ देंगे तो गिरना मत
अपने होते तो हर दम होते।
तुम्हें दुख होगा
दर्द भी बहुत
पर जूझना.....
तुम टूट भी जाओ
तुम्हारा 'खून'* हारेगा नहीं।
*Lineage
For women who still face social evils